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लालची नौकर रामु और श्यामू की कहानी | Lalchi Naukar Ramu aur Shyamu ki Kahani | Hindi Moral Stories

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लालची नौकर श्यामू की कहानी | Lalchi Naukar Shyamu Kahaniya | Hindi Moral Stories
Lalchi Naukar Shyamu Kahaniya | Hindi Moral Stories

लालची नौकर रामु और श्यामू की कहानी | Lalchi Naukar Ramu aur Shyamu ki Kahani


लालची नौकर श्यामू की कहानी

एक छोटे से गांव की कहानी है। एक गांव में सत्तूराम और शांताबाई नाम के दो लोग रहते थे, उनको एक बेटा था पर नौकरी शहर में होने के कारण वह अपने माता-पिता के पास नहीं रह सकता था। एक दिन बेटा मुकेश बोला मां-पिताजी तुम भी मेरे साथ शहर चलो ना, हम वही साथ में रहेंगे इस पर सत्तूराम बोले नहीं बेटा हम नहीं चलेंगे, मुझे यह खूब सूरत गांव छोड़ कर कहीं नहीं जाना, यही हमारे सब रिश्तेदार हैं और यही हम रहेंगे। इस पर मुकेश बोला पर आप मेरे साथ चलते तो अच्छा होता। तब सत्तूराम बोले बेटा तुम हमारी फिक्र मत करो हम बड़े आराम से रह लेंगे और हमारे साथ हमारा नौकर श्यामू भी है, जो हमारी देखभाल करेगा तुम सिर्फ अपनी नौकरी के बारे में सोचो और खुद का ख्याल रखना हमारा आशीर्वाद तुम्हारे साथ सदैव रहेगा। यह सुनते ही मुकेश अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेकर शहर की ओर चला गया।


अब घर में सत्तूराम और शांताबाई अकेले रहते थे और साथ में उनका नौकर श्यामू। श्यामू घर का सारा काम करता था जैसे साफ सफाई,पानी भरना, खाना पकाना इत्यादि। श्यामू कई वर्षों से उनके पास काम कर रहा था इसलिए सत्तूराम और शांताबाई उस पर पूरा विश्वास करते थे। श्यामू दोनों की बड़ी सेवा करता था और फिर अपने घर चला जाता था। घर जाने के बाद श्यामू की पत्नी कहती आजकल  तुम्हें आने में बड़ी देर होती है, श्यामू क्या करूं भगवान आजकल घर का काम पूरा मुझे ही करना पड़ रहा है, उनका बेटा नौकरी के लिए शहर चला गया अब दोनों बेचारे अकेले हैं। इस पर श्यामू की पत्नी ने झट से बोली अकेले मतलब बिल्कुल अकेली, श्यामू बोला जी हां सच में अकेले हैं। श्यामू की पत्नी आगे बोली, अगर वह अकेले हैं तो कुछ अच्छे अच्छे पकवान बनवाकर लाओ उन्हें क्या पता चलेगा बहुत दिन हो गए अच्छा खाना खाए।


इस पर श्यामू बोला, ठीक है भगवान कल जरूर लाता हूं अगले दिन श्यामू काम पर गया। घर का सारा काम किया और अंत में अपनी पत्नी के लिए चोरी छुपे अच्छे व्यंजन बनाएं और घर ले आया फिर यह सिल-सिला चलता रहा। देखते ही देखते श्यामू की पत्नी की लालच बढ़ती गई उसने खाने के अलावा घर की चीजें चुराने का आश्वासन दिया। फिर एक दिन श्यामू ने चुपके से चम्मच चुराया और दूसरे दिन लोटा चुराया और तीसरे दिन कोई और बर्तन और यह सिलसिला कुछ दिनों तक यूं ही चलता रहा। एक दिन सत्तूराम रोज के काम से, घर वापस आए और अपना लोटा ढूंढने लगे। श्यामू अरे वह लूटा कहां रखा, श्यामू ने जवाब दिया मालिक यही कहीं होगा सत्तूराम ने बहुत ढूंढा उन्हें लौटा कहीं नहीं मिला अगले दिन शांताबाई चम्मच ढूंढ रही थी लेकिन उन्हें भी कहीं नहीं मिला।


तब शांताबाई ने सोचा जरूर कुछ गड़बड़ है यह सारी चीजें अपने आप कहां जा सकती हैं शांताबाई ने सत्तूराम से कहा, अजी सुनते हो हमारी घर की एक एक चीज गायब हो रही है जरूर कुछ गड़बड़ है। इस पर सत्तूराम बोले हां भगवान मेरा लोटा भी कितने दिनों से गायब है जरूर गड़बड़ है। अगले दिन सत्तूराम बाहर जाकर 3-4 बिच्छू पकड़कर एक डब्बे में रख देता है और डब्बे को घर के अंदर ले आता है और श्यामू को देखकर कहता है। श्यामू यह डिब्बा मेरे पलंग के सिरहाने रख दे इसमें सोने के जेवर है कल डब्बे को बैंक ले जाकर जमा कर देना है आज के दिन संभालना पड़ेगा। श्यामू ने वह डिब्बा लिया और सत्तूराम के पलंग के नीचे रख दिया और अपना रोज का काम करने लगा। लेकिन काम करते समय ध्यान सिर्फ उस डिब्बे पर था। जैसे ही दोपहर का खाना खाने के बाद सत्तूराम और शांताबाई सोने के लिए तैयार हुए लालची श्यामू उस डब्बे की ओर बढ़ा और उसे खोला तो उसमें से तीन बिच्छू बाहर आए यह देखकर श्यामू घबरा गया और इधर उधर दौड़ने लगा बचाओ-बचाओ बिच्छू-बिच्छू मुझे काट खाएगा बचाओ।


सोर्स सुनके सत्तूराम और शांताबाई जाग उठे और उन्होंने बिच्छू को डब्बे में बंद कर दिया। सत्तूराम बोला मुझे पूरा यकीन था कि तुम चोरी कर रहे थे। मैं सिर्फ तुम्हें सबक सिखाना चाहता था। तुम्हें क्या लगा कि हम बूढ़े हो गए हैं तो हमें कुछ पता नहीं चलेगा। मैं तो पहले से ही समझ गया था कि तुम खाना लेकर जाते थे। हमने सोचा खाना ही तो है क्या फर्क पड़ता है लेकिन दिन-ब-दिन तुम्हारा लालच बढ़ता गया और तुम घर की वस्तुएं चुराने लगे शर्म आनी चाहिए तुम्हें। जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो। श्यामू को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह रोने लगा।


सीख :- तो बच्चों क्या समझे इस कहानी से लालच करना बुरी बला है लालच का रास्ता हमेशा बुराई की ओर जाता है।


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