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विज्ञान के चमत्कार पर हिन्दी निबंध | Vigyan ke chamatkar पर हिन्दी Essay | Science के 10 चमत्कार पर हिन्दी निबंध

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विज्ञान के चमत्कार पर हिन्दी निबंध | Vigyan ke chamatkar पर हिन्दी Essay | Science के 10 चमत्कार पर हिन्दी निबंध
Vigyan ke chamatkar पर हिन्दी Essay | Science के 10 चमत्कार पर हिन्दी निबंध


विज्ञान के चमत्कार पर हिन्दी निबंध | Vigyan ke chamatkar पर हिन्दी Essay | Science के 10 चमत्कार पर हिन्दी निबंध


नहाने के बाद हमें ठण्ड क्यों लगती है ?

जब हम नहाते हैं तो हमें ताजगी महसूस होती है। नहाने के बाद हवा लगने पर हमें ठण्ड अधिक महसूस होती है। क्योंकि पानी का वाष्पीकरण तो वैसे भी होता ही है, पर हवा लगने पर वाष्पीकरण की यह क्रिया तेजी से होने लगती है और नतीजा यह होता है कि इस क्रिया के लिए शरीर द्वारा ऊष्मा खर्च कर दिए जाने के कारण शरीर का तापक्रम गिरता है और हमें ठण्ड महसूस होने लगती है।


घड़े में पानी ठण्डा हो जाता है जबकि अन्य बर्तनों में नहीं, क्यों ?

पानी का ठण्डा होना वाष्पीकरण की क्रिया पर आधारित है। मिट्टी के बने घड़े में बाहरी पृष्ठ पर असंख्य छिद्र होते हैं। जिन पर अन्दर का जल रिस - रिस कर इकट्ठा होता है। वायुमण्डल की हवा जब इनसे टकराती है तो बाष्पीकरण के लिए आवश्यक गुप्त ऊष्मा अन्दर के जल से ले लेती है जिससे घड़े के अन्दर का पानी ठण्डा हो जाता है। इसके विपरीत अन्य बर्तनों की सतह पर छिद्र नहीं होते अतः पानी का वाष्पीकरण नही हो पाता जिससे पानी ठण्डा नहीं होता।


नाखून काटने में दर्द क्यों नहीं होता ?

नाखून मृत कोशिकाओं का बना होता है। नाखून में रूधिर कोशिकाएं नहीं पाई जाती हैं। अतः काटने पर दर्द नहीं होता।


एक विशाल जहाज पानी मैं तेरता रहता है किन्तु ब्लेड पानी में डूब जाता है, क्यों ?

जहाज लोहे की चादर का इस प्रकार बनाया जाता है, कि इसके अन्दर काफी खाली जगह होती है। इस कारण इसके थोड़े से ही डूबे भाग द्वारा हटाए गए पानी का भार जहाज, यात्रियों और सामान आदि के भार के बराबर हो जाता है। अतः जहाज पानी पर तैरता है। इसके विपरीत ब्लेड द्वारा हटाए गए पानी का भार ब्लेड के भार से कम होता। अत : ब्लेड पानी में डूब जाता है।


पानी अंगुली में चिपक जाता है, लेकिन पारा नही, क्यों

किस्तु वस्तु को चिपकाने के लिए जो बल प्रयुक्त होता है वह आसंजन व ससंजन बल है। आसंजन बल वह बल है जो द्रव और अंगुली के मध्य लगता है। संसजल बल वह बल है जो द्रव के अणुओं के मध्य लगता है। यही बल द्रव के पृष्ठ तनाव की क्रिया को स्पष्ट करता है। यदि आसंजन बल, संसजन बल की अपेक्षा अधिक हो, तभी द्रव किसी वस्तु से चिपकता है। पानी में आसंजन बल संसजन बल की अपेक्षा अधिक होता है। जिस वजह से यह हाथ को गीला करता है। इसके विपरीत उच्च पृष्ठ तनाव के कारण पारा हाथ को गीला नहीं करता है। दूसरे शब्दों में पारे का संसजन बल आसंजन बल की अपेक्षा अधिक होता है।


रात में पेड़ के नीचे क्यों नहीं सोना चाहिए ?

पौधे सूर्य के प्रकाश में कार्बन डाइआकाइड ग्रहण करते हैं और प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजन बनाते हैं और आक्सीजन छोड़ते हैं। किन्तु रात्रि के समय ये कर्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। अतः रात्रि के समय पेड़ों के नीचे नहीं सोना चाहिए।


मोटे कांच के गिलास में गर्म चाय डालने पर गिलास टूट जाता है किन्तु पतले कांच के गिलास में ऐसा नहीं होता क्यों ?

साधारणत : कोई भी ठोस वस्तु ऊष्मा पाकर फैलती है क्योंकि ऊष्मा से पदार्थ के अणुओं को परस्पर बांधकर रखने वाले सहसंयोजक बंध ढीले पड़ जाते हैं। जब हम मोटे कांच के गिलास में गर्म चाय डालते हैं तो गिलास की भीतरी सतह गर्म चाय से ऊष्मा पाकर शीघ्रता से फैलने का प्रयास करती है और बाहरी सतह जिसका तापमान वायुमण्डलीय तापमान के बराबर होता है। उसका भीतरी सतह से दूर होने के कारण वहां हो रहे तापीय परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसा होने से वह अपनी स्थिति का आकर यथावत् बनाए रखता है परन्तु उधर भीतरी सतह में ऊष्मीय परिवर्तन के कारण हो रहे फैलाव से बाह्य सतह चटक जाती है और गिलास टूट जाता है। इसके विपरीत पतले कांच के गिलास की बाह्य और भीतरी दोनों सतहों में समान तापीय परिवर्तन होता है, जिससे गिलास नहीं टूटता।


कुछ पर्वतारोहियों के पहाड़ पर चढ़ते समय उनके नाक से खून क्यों निकलता है ?

द्रव हमेशा अधिक दबाव वाले क्षेत्र से कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर गतिमान होता है। जैसे - जैसे हम समुद्र तल से ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, वायुमंडलीय दाब कम होता जाता है। पर्वतारोही इस बदली परिस्थिति से तारतम्य नहीं बिठा पाता, इसलिए उनकी नाक से खून निकलने लगता है ।


मनुष्य की याददाश्त क्यों चली जाती है ?

बढ़ती हुई उम्र के साथ - साथ जब स्नायु कोशिकाएं जिनसे मस्तिष्क का निर्माण होता है, धीरे - धीरे मृत होने लगती हैं जिससे मनुष्य की कार्यक्षमता कम होने लगती है। जिस आयु पर यह प्रक्रिया प्रारंभ होती है वह मनुष्यों में अलग - अलग होती है। एक वयस्क व्यक्ति में केवल उतनी ही स्नायु कोशिकाएं होती हैं जितनी उसके जन्म के समय होती हैं। ये कोशिकाएं शरीर की वृद्धि के साथ गुणित नहीं होती जैसा कि अस्थि या त्वचा कोशिकाओं में होता है। वास्तव में जैसे - जैसे कोई व्यक्ति आयु में वृद्धि करता है तो उसमें स्नायु कोशिकाएं धीरे - धीरे कम होने लगती हैं। क्योंकि ये कोशिकाएं विभाजन नहीं करतीं अतः मृत कोशिकाओं के स्थान पर नई कोशिकाएं नहीं बनतीं बल्कि इनका स्थान ग्लायल कोशिकाएं ले लेती हैं। सत्तर या अस्सी वर्ष की आयु में लगभग एक चौथाई स्नायु कोशिकाएं समाप्त हो जाती हैं। यही कारण है कि वय वृद्धि के साथ - साथ मनुष्य की याददाश्त कम हो जाती है। कभी - कभी दुर्घटनावश मनुष्य की स्नायु कोशिकाएं एकाएक निष्क्रिय हो जाती हैं, जिससे मनुष्य की याददाश्त चली जाती है।


बर्फ का टुकड़ा पानी पर तैरता है, क्यों ?

जब पानी बर्फ बनता है, तो आयतन में बढ़ जाता है तथा बर्फ का घनत्व कम हो जाता है। अत : बर्फ का घनत्व पानी के घनत्व से कर होने के कारण वह पानी पर तैरता है।


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