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विज्ञान से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य, जो आपको जानना चाहिए

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गिरगिट अपना रंग कैसे बदल लेता है ?
गिरगिट अपना रंग कैसे बदल लेता है ?


विज्ञान से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य, जो आपको जानना चाहिए 
| Some Most Important Facts Relating To Science, Which You Should Know.


Vigyan Se Sambandhit Kuch Mahatvpurn Fact

गिरगिट अपना रंग कैसे बदल लेता है ?

सरीसृप वर्ग के कुछ जन्तु जैसे गिरगिट आदि जिस स्थान पर बैठते हैं, उसी स्थान के रंग के अनुसार अपना रंग भी बदल लेते हैं ताकि शत्रु उनको आसानी से न देख पाए और इन प्राणियों की त्वचा में कुछ विशेष प्रकार की रंजक कोशिकाएं अथवा मैलेनोफोर होती हैं जो ताप बढ़ने तथा घटने के साथ - साथ सिकुड़ती व फैलती हैं। ये कोशिकाएं इनके शरीर में स्रावित होने वाले कुछ हार्मोनों द्वारा उत्तेजित होकर रंग बदलती हैं। ये हार्मोन इण्टरमेडिन एसीटिल कोलीन तथा एड्रीनेलिन हैं। त्वचा की ऊपरी सतह की कोशिकाएं पीली, उसके नीचे गहरी भूरी तथा काले रंग की, और सबसे नीचे सफेद रंग की होती हैं। ताप कम होने से इनका रंग गहरा और ताप बढ़ने से रंग हल्का होने लगता है। रात्रि में विचरण करने वाले सरीसृपों में विपरीत प्रतिक्रिया होती है। लैंगिक तथा भावनात्मक अवस्था का भी इनके रंग पर प्रभाव पड़ता है पेड़ों पर चढ़ने वाले या उन पर वास करने वाले सरीसृपों में रंग बदलने की प्रवृत्ति अधिक होती है। यह हरा, पीला, भूरा तथा स्लेटी रंग बदलते हैं।


सूर्य का आकार उदय एवम् अस्त के समय सामान्य आकार से बहुत बड़ा एवम् लाल क्यों दिखाई देता है ?
सूर्य का आकार उदय एवम् अस्त के समय बहुत बड़ा एवम् लाल क्यों दिखाई देता है ?


सूर्य का आकार उदय एवम् अस्त के समय सामान्य आकार से बहुत बड़ा एवम् लाल क्यों दिखाई देता है ?

क्योंकि यह प्रकाश के विकिरण सिद्धांत की वजह से होता है। क्षितिज के समीप वायुमंडल से होकर गुजरने वाली सूर्य की सफेद रोशनी में से नीली किरणें हवा के कणों द्वारा विकिरण होती हैं। जबकि लाल किरणें सबसे कम विकिरण होती है, इसलिए सूर्य लाल नजर आता है। सूर्य के आकार में परिवर्तन वायुमण्डलीय दबाव की वजह से आता है। चूंकि ऊंचाई घटने पर परिवर्तन की मात्रा बढ़ती है, इसलिए ऊर्ध्वतल छोटा हो जाता है जबकि क्षितिज तल बढ़ जाता है। इसलिए सूर्य क्षितिज के समीप बड़ा नजर आता है। अर्थात् सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य बड़ा नजर आता है।


लालटेन की बत्ती में मिट्टी का तेल बराबर चढ़ता रहता है, क्यों ?
लालटेन की बत्ती में मिट्टी का तेल बराबर चढ़ता रहता है, क्यों ?


लालटेन की बत्ती में मिट्टी का तेल बराबर चढ़ता रहता है, क्यों ?

लालटेन की बत्ती में मिट्टी का तेल चढ़ने का कार्य कोशिका क्रिया पर निर्भर करता है। लालटेन की बत्ती सरन्ध होती है। जब इसे तेल में डूबोते हैं तो तेल इसके महीन छिद्रों में से होकर चारों ओर फैल जाता है और ऊपर तक पहुंच जाता है। इसी वजह से लालटेन की बत्ती में मिट्टी का तेल बराबर चढ़ता रहता है।


दौड़ने पर हमें गर्मी अनुभव होने लगती है तथा साथ ही हम तेजी से सांस लेने लगते हैं, क्यों ?
दौड़ने पर हमें गर्मी अनुभव होने लगती है तथा साथ ही हम तेजी से सांस लेने लगते हैं, क्यों ?


दौड़ने पर हमें गर्मी अनुभव होने लगती है तथा साथ ही हम तेजी से सांस लेने लगते हैं, क्यों ?

दौड़ने पर हमें अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इसी लिए हम तेजी से सांस लेने लगते हैं और अधिक दौड़ने की वजह से हमारे शरीर में अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है जिसकी वजह से हमें गर्मी का अनुभव होता है।


हम लोग जो बोलते हैं या गीत - संगीत सुनते हैं, वह ध्वनि सुनने के पश्चात विलुप्त क्यों हो जाती है ?
हम लोग जो बोलते हैं या गीत - संगीत सुनते हैं, वह ध्वनि सुनने के पश्चात विलुप्त क्यों हो जाती है ?


हम लोग जो बोलते हैं या गीत - संगीत सुनते हैं, वह ध्वनि सुनने के पश्चात विलुप्त क्यों हो जाती है ?

ध्वनि कुछ और नहीं बल्कि तरंगें होती हैं। तरंग ऊष्मा संवाहक होते हैं जो ऊर्जा को वे जिस माध्यम में गतिमान है उस माध्यम में निरन्तर ट्रांसफर करते हैं। अतः जैसे - जैसे तरंगे आगे बढ़ती हैं, ऊर्जा का क्षय हो जाता है और अन्ततः वह अपनी सारी ऊर्जा स्थानान्तरित कर देती है। इसलिए ध्वनि विलुप्त हो जाती है।


बर्फ का टुकड़ा पारदर्शी होता है पर इसे पीसने पर इसका ' बुरादा ' अपारदर्शी हो जाता है, ऐसा क्यों ?
बर्फ का टुकड़ा पारदर्शी होता है पर इसे पीसने पर इसका ' बुरादा ' अपारदर्शी हो जाता है, ऐसा क्यों ?


बर्फ का टुकड़ा पारदर्शी होता है पर इसे पीसने पर इसका ' बुरादा ' अपारदर्शी हो जाता है, ऐसा क्यों ?

जब सफेद रोशनी बर्फ के टुकड़े पर पड़ती है, वह उसके लाखों छोटे कणों द्वारा वापस परावर्तित हो जाती है। चूंकि बर्फ के बुरादे द्वारा प्रकाश का अवशोषण नहीं होता इसलिए वह अपारदर्शी होता है।


बल्ब के प्रकाश के रंग एवम् ट्यूब लाइट के प्रकाश के रंग में अन्तर क्यों होता है।
बल्ब के प्रकाश के रंग एवम् ट्यूब लाइट के प्रकाश के रंग में अन्तर क्यों होता है।


बल्ब के प्रकाश के रंग एवम् ट्यूब लाइट के प्रकाश के रंग में अन्तर क्यों होता है।

प्रकाश का रंग उसके स्रोत पर निर्भर करता है। बल्ब का प्रकाश उसमें स्थित टंगस्टन फिलोमेन्ट की वजह से मिलता है। जबकि ट्यूबलाइट के प्रकाश का स्रोत उसमें भरी गैस होती है।


खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरक डालने पर पौधे मुरझाने क्यों लगते हैं।
खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरक डालने पर पौधे मुरझाने क्यों लगते हैं ?


खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरक डालने पर पौधे मुरझाने क्यों लगते हैं।

जड़ों के मूल रोमों में उपस्थित जल खनिज लवणों के घोल की अपेक्षा अधिक तनु होता है। अतः परासरण द्वारा जल भूमि से मूल रोमों में प्रवेश करता है। खेतों में अधिक उर्वरकों का प्रयोग करने से भूमि का विलयन मूल रोमों की अपेक्षा अधिक गाढ़ा हो जाएगा। परिणाम स्वरूप यह परासरण द्वारा मूल रोमों से जल का भूमि की ओर जाना शुरू हो जाएगा इसलिए खेतों में आवश्यकता से अधिक उर्वरक डालने पर पौधे मुरझाने लगते हैं।


रेल की सिग्नल बत्ती हो या खतरे की जगह पर प्रायः लाल रंग का ही प्रयोग किया जाता है। अन्य रंगों का नहीं। ऐसा क्यों ?
रेल की सिग्नल बत्ती हो या खतरे की जगह पर प्रायः लाल रंग का ही प्रयोग किया जाता है।


रेल की सिग्नल बत्ती हो या खतरे की जगह पर प्रायः लाल रंग का ही प्रयोग किया जाता है। अन्य रंगों का नहीं। ऐसा क्यों ?

सभी रंगों की तुलना में लाल रंग का तरंग दैर्ध्य सबसे अधिक होता है। जिसकी वजह से वह दूर से ही पहचाना जा सकता है। इसीलिए खतरों से जल्दी आगाह करने के लिए लाल रंग का ही प्रयोग किया जाता है।


चमगादड़ रात में आसानी से कैसे उड़ सकते हैं ?
चमगादड़ रात में आसानी से कैसे उड़ सकते हैं ?


चमगादड़ रात में आसानी से कैसे उड़ सकते हैं ?

चमगादड़ों से पराश्रव्य तरंगें निकलती हैं, जोकि बाधा से टकराकर पुनः उनके पास पहुंच जाती हैं और उन्हें बाधा का ज्ञान हो जाता है। अतः वे बाधा से बचकर रात्रि में भी आसानी से उड़ लेते हैं।

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